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Title: Sex Therepi:-लिंग क्या होता है(What is Penis)
Author: Unknown
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लिंग के तीन भाग होते हैं- मूल (Root)- यह लिंग का मूलाधार से जुड़ा रहने वाला भाग होता है। काय (दण्ड) (Body)- यह लिंग के अगले भाग, लिंगमुण्ड...

लिंग के तीन भाग होते हैं-
मूल (Root)- यह लिंग का मूलाधार से जुड़ा रहने वाला भाग होता है।
काय (दण्ड) (Body)- यह लिंग के अगले भाग, लिंगमुण्ड (Glans penis) एवं मूल (root) के बीच का लम्बाकार भाग होता है। यह भाग हर्षण या उच्छायी ऊतक (erectile tissue) और
अनैच्छिक पेशी की तीन बेलनाकार दण्डिकाओं से मिलकर बना होता है। इनमें से दो पार्श्वीय दण्डिकाएं होती है कॉर्पोरा केवरनोसा और (Corpora cavernosa) एक इनके बीच की दण्डिका होती है कॉर्पस स्पान्जियोसम (Corpus spongiosum)। इस एक दण्डिका के अंदर मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) रहता है जो लिंगमुण्ड पर खुलता है। कॉर्पोरा कैवरनोसा दण्डिकाएं घने, कम लचीले संयोजी
ऊतक (tunica albuginea) से घिरी रहती है तथा इनमें असंख्य रक्तधर कोष्ठ मौजूद रहते हैं जिन्हें शिरीय साइनुसॉयड्स (venous sinusoids) कहा जाता है। ये कोष्ठ लिंग के शिथिल होने की अवस्था में तो खाली रहते हैं परंतु उसके उत्तेजित होने के दौरान रक्त से भरकर फूल जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप लिंग सख्त, तनावपूर्ण, लम्बा एवं मोटा हो जाता है, जिसे हर्षण या स्तम्भन (erection) कहते हैं।
लिंगमुण्ड (Glans penis)- यह लिंग का सबसे आगे का मोटा सुपारी जैसा नजर आने वाला भाग होता है। यह कॉर्पस कैवरनोसा के ऊपर कॉर्पस स्पॉजियोसम का ही विस्तारण है। चूंकि इस भाग में अनेकों तंत्रिका अंत (nervendings) मौजूद रहते हैं इसलिए यह क्षेत्र बहुत ज्यादा संवेदनशील माना जाता है तथा लिंग उत्तेजना का महत्वपूर्ण स्रोत होता है। शिश्नीय तंत्रिका अंत (penile nerve endings) विशेष तौर से मुण्ड के सबसे पास के किनार (इस किनार को कॉरोना (corona) कहते हैं) में अधिक रहते हैं। लिंग के ऊपर की ढीली त्वचा मुण्ड के ऊपर आगे की तरफ मुड़कर (fold) लिंग मुण्डच्छद (prepuce) अथवा शिश्नाग्रच्छद (foreskin) कहलाती है। फाइमोसिस की दशा में या धार्मिक उद्देश्यों के लिए शिश्नाग्रच्छद को काटकर अलग कर दिया जाता है। इसे आम भाषा में सुन्नत या ‘खतना करवाना’ (circumcision) कहते हैं। लिंगमुण्ड की किनार (corona) के बिल्कुल नीचे, बंध (frenum) के दोनों ओर शिश्नमुण्डच्छदीय या टाइसन्ज ग्रंथियां (tyson’s glands) रहती है। यह ग्रंथियां एक तैलीय स्राव करती है। इनका स्राव लिंगमुण्ड और कॉरोना की जीर्ण एवं मृत कोशिकाओं के साथ मिलकर एक पनीर जैसा पदार्थ निर्मित करता है, जिसे शिश्नमल (smegma) कहते हैं। इसके जमा होने पर लिंग में संक्रमण होने का डर रहता है।

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Sex Therepi 


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